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हरदुआगंज तापीय परियोजना में टला बड़ा हादसा कन्वेयर बेल्ट फटने से कोयले की आपूर्ति हुई आधी

कासिमपुर: हरदुआगंज तापीय परियोजना की 660 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट नंबर-10 में सोमवार को बड़ा हादसा होने से बच गया। चालू हालत में अचानक कन्वेयर बेल्ट नंबर ‘सीबी’ के फट जाने से यूनिट तक पहुंचने वाली कोयले की आपूर्ति प्रभावित हो गई। फिलहाल कोयले की आपूर्ति लगभग आधी रह गई है और पूरे सिस्टम को एक ही कन्वेयर बेल्ट के सहारे संचालित किया जा रहा है।
एक बेल्ट बंद होने के बाद दूसरी बेल्ट पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। ऐसे में प्लांट प्रबंधन के सामने जल्द से जल्द खराब बेल्ट को ठीक कर व्यवस्था सामान्य करने की चुनौती है। यदि चालू दूसरी बेल्ट में भी खराबी आती है तो यूनिट के बंकरों तक कोयले की आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित हो सकती है।
चालू हालत में अचानक फटी कन्वेयर बेल्ट
जानकारी के अनुसार यूनिट नंबर-10 के लिए कोयला पहुंचाने वाली कन्वेयर व्यवस्था सामान्य रूप से काम कर रही थी। इसी दौरान बेल्ट नंबर ‘सीबी’ अचानक फट गई।
बेल्ट खराब होते ही कोयले की नियमित आपूर्ति पर असर पड़ा। प्लांट में कोयले को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में कन्वेयर बेल्ट की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए एक बेल्ट में आई खराबी का सीधा असर यूनिट तक पहुंचने वाले कोयले की मात्रा पर पड़ा है।
घटना के बाद संबंधित कर्मचारियों और तकनीकी टीम को स्थिति की जानकारी दी गई और व्यवस्था को दूसरी उपलब्ध बेल्ट के माध्यम से चलाया गया।
कोयले की आपूर्ति हुई आधी
एक कन्वेयर बेल्ट के बंद होने के बाद 660 मेगावाट की यूनिट नंबर-10 तक पहुंचने वाले कोयले की आपूर्ति लगभग आधी रह गई है।
तापीय बिजलीघर में बिजली उत्पादन के लिए कोयले की लगातार उपलब्धता बेहद जरूरी होती है। कोयला पहले प्लांट के विभिन्न हिस्सों से कन्वेयर सिस्टम के जरिए बंकर तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत इसका इस्तेमाल बिजली उत्पादन में किया जाता है।
ऐसे में लंबे समय तक कोयले की आपूर्ति प्रभावित रहने पर यूनिट के संचालन पर दबाव बढ़ सकता है।
एक ही बेल्ट के भरोसे पूरा सिस्टम
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यह है कि कोयले की आपूर्ति के लिए पूरा सिस्टम एक ही कन्वेयर बेल्ट पर निर्भर हो गया है। सामान्य परिस्थितियों में उपलब्ध बेल्टों के जरिए लोड को संभाला जाता है, लेकिन एक बेल्ट के खराब होने के बाद दूसरी बेल्ट पर अतिरिक्त भार आ गया है।
इससे चालू बेल्ट को लगातार ज्यादा क्षमता के साथ काम करना पड़ रहा है। कर्मचारियों के बीच इसे लेकर चिंता बनी हुई है कि यदि अतिरिक्त भार के कारण दूसरी बेल्ट में भी तकनीकी खराबी आती है तो समस्या गंभीर हो सकती है।
प्लांट में कोयले की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के लिए कन्वेयर सिस्टम का सही तरीके से काम करना जरूरी है।
दूसरी बेल्ट पर बढ़ा दोगुना दबाव
एक बेल्ट के बंद होने से चालू कन्वेयर बेल्ट पर पहले की तुलना में अधिक लोड आ गया है। लगातार अतिरिक्त भार पड़ने से उसके क्षतिग्रस्त होने की आशंका भी बढ़ गई है।
तकनीकी व्यवस्था में किसी एक महत्वपूर्ण हिस्से पर जरूरत से अधिक भार पड़ने से टूट-फूट या अन्य तकनीकी समस्या का जोखिम बढ़ सकता है। इसी वजह से खराब बेल्ट की जल्द मरम्मत जरूरी मानी जा रही है।
यदि समय रहते व्यवस्था सामान्य नहीं हुई तो दूसरी बेल्ट पर दबाव लगातार बना रहेगा।
दूसरी बेल्ट टूटी तो ठप हो सकती है सप्लाई
सबसे गंभीर स्थिति तब पैदा हो सकती है जब वर्तमान में चल रही दूसरी कन्वेयर बेल्ट भी खराब हो जाए। ऐसी स्थिति में यूनिट के बंकरों तक कोयला पहुंचाने की व्यवस्था पूरी तरह ठप हो सकती है।
बंकर तक कोयला नहीं पहुंचने पर उपलब्ध स्टॉक के आधार पर ही कुछ समय तक यूनिट का संचालन संभव होगा। इसके बाद उत्पादन प्रभावित होने की स्थिति पैदा हो सकती है।
यही वजह है कि प्लांट में तकनीकी टीम के सामने मौजूदा कन्वेयर बेल्ट की निगरानी के साथ खराब बेल्ट को जल्द ठीक करने की बड़ी जिम्मेदारी है।
660 मेगावाट की है यूनिट नंबर-10
हरदुआगंज तापीय परियोजना की यूनिट नंबर-10 की क्षमता 660 मेगावाट है। बड़ी क्षमता वाली इस यूनिट को सुचारू रूप से चलाने के लिए पर्याप्त मात्रा में कोयले की नियमित आपूर्ति जरूरी है।
कोयले की आपूर्ति में लंबा व्यवधान आने पर उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है। इसलिए परियोजना में कोल हैंडलिंग सिस्टम को महत्वपूर्ण माना जाता है।
कन्वेयर बेल्ट इसी व्यवस्था का अहम हिस्सा है और इसके माध्यम से बड़ी मात्रा में कोयला लगातार यूनिट के लिए पहुंचाया जाता है।
तकनीकी टीम के सामने बड़ी चुनौती
बेल्ट फटने के बाद तकनीकी टीम के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। पहली चुनौती खराब हुई बेल्ट की जल्द से जल्द मरम्मत करना है, जबकि दूसरी चुनौती वर्तमान में चल रही बेल्ट को अतिरिक्त भार से सुरक्षित रखना है।
मरम्मत में ज्यादा समय लगने पर दूसरी बेल्ट को लगातार अतिरिक्त दबाव झेलना पड़ेगा। इससे उसकी नियमित निगरानी और रखरखाव भी जरूरी हो गया है।
प्लांट में ऐसी स्थिति में तकनीकी कर्मचारियों को कन्वेयर सिस्टम के विभिन्न हिस्सों की लगातार जांच करनी पड़ सकती है।
कोयला बंकर की स्थिति भी महत्वपूर्ण
यूनिट के संचालन में कोयला बंकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कन्वेयर बेल्ट से आने वाला कोयला बंकरों में पहुंचता है और वहां से आगे उत्पादन प्रक्रिया में इस्तेमाल किया जाता है।
यदि कन्वेयर व्यवस्था पूरी तरह बंद होती है तो बंकर में मौजूद कोयले के स्टॉक पर निर्भरता बढ़ जाती है। स्टॉक समाप्त होने की स्थिति में यूनिट के संचालन को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
इसी कारण बेल्ट की खराबी को जल्द दूर करना परियोजना प्रबंधन के लिए प्राथमिकता बन गई है।
उत्पादन प्रभावित होने का बढ़ सकता है खतरा
फिलहाल एक कन्वेयर बेल्ट के जरिए कोयले की आपूर्ति जारी है, इसलिए सप्लाई पूरी तरह बंद नहीं हुई है। हालांकि आपूर्ति आधी होने और दूसरी बेल्ट पर अतिरिक्त दबाव के कारण स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।
यदि खराब बेल्ट की मरम्मत जल्द हो जाती है तो कोयले की आपूर्ति सामान्य की जा सकती है। लेकिन दूसरी बेल्ट में भी तकनीकी समस्या आने की स्थिति में यूनिट के उत्पादन पर असर पड़ने का खतरा बढ़ जाएगा।
जल्द मरम्मत पर टिकी नजर
हरदुआगंज तापीय परियोजना की 660 मेगावाट यूनिट नंबर-10 में फिलहाल सबसे ज्यादा ध्यान खराब कन्वेयर बेल्ट की मरम्मत पर है। एक बेल्ट के सहारे सिस्टम चलने से तकनीकी जोखिम बढ़ा हुआ है।
सोमवार को हुई घटना में बड़ा हादसा टल गया, लेकिन इसने कन्वेयर सिस्टम की निर्भरता और तकनीकी रखरखाव की अहमियत को सामने ला दिया है।
अब नजर इस बात पर है कि खराब बेल्ट को कितनी जल्दी ठीक कर दोनों कन्वेयर बेल्ट से कोयले की सामान्य आपूर्ति बहाल की जाती है। जब तक ऐसा नहीं होता, यूनिट तक कोयला पहुंचाने वाली दूसरी बेल्ट पर अतिरिक्त दबाव बना रहेगा।





